Friday, January 18, 2019

बच्चे एक दिन

बच्चे 
अंतरिक्ष में 
एक दिन निकलेंगे 
अपनी धुन में, 
और बीनकर ले आयेंगे 
अधखाये फलों और 
रकम-रकम के पत्थरों की तरह 
कुछ तारों को । 

आकाश को पुरानी चांदनी की तरह 
अपने कंधों पर ढोकर 
अपने खेल के लिए 
उठा ले आयेंगे बच्चे 
एक दिन । 

बच्चे एक दिन यमलोक पर धावा बोलेंगे 
और छुड़ा ले आयेंगे 
सब पुरखों को 
वापस पृथ्वी पर,
और फिर आँखें फाड़े 
विस्मय से सुनते रहेंगे 
एक अनन्त कहानी 
सदियों तक । 

बच्चे एक दिन......

(रचनाकालः1986)
               अशोक वाजपेयी

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