Thursday, January 24, 2019

देखो आहिस्ता चलो

देखो, आहिस्ता चलो और भी आहिस्ता ज़रा 

देखना, सोच सँभल कर ज़रा पाँव रखना 

ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं

कांच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में 

ख़्वाब टूटे न कोई जाग न जाए देखो 


जाग जाएगा कोई ख़्वाब तो मर जाएगा
                                          -गुलज़ार    

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