Thursday, January 24, 2019

स्पर्श

कुरान हाथों में लेके नाबीना एक नमाज़ी 
लबों पे रखता था 
दोनों आँखों से चूमता था 
झुकाके पेशानी यूँ अक़ीदत से छू रहा था 
जो आयतें पढ़ नहीं सका 
उन के लम्स महसूस कर रहा हो 


मैं हैराँ-हैराँ गुज़र गया था 
मैं हैराँ हैराँ ठहर गया हूँ 


तुम्हारे हाथों को चूम कर 
छू के अपनी आँखों से आज मैं ने 
जो आयतें पढ़ नहीं सका 
उन के लम्स महसूस कर लिये हैं
                                   -गुलज़ार

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