Tuesday, February 5, 2019

कविता

कविता जीवन का क्लोरोफिल
और जीवन सृष्टि का पत्ता
उलटता पृष्ठ यह सोचकर
कौन सोया है इस वृक्ष की छाया में
किसका यह सपना
जो देखता मैं
उसे अपना समझ कर.
                          -मोहन राणा

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