हिंदी काव्य पंक्तियाँ - Hindi Kavya Panktiya
Tuesday, February 5, 2019
समतल
ऊँचाईयाँ अनुपस्थित हैं यहाँ कि
देख सकता हूँ गोलार्द्ध के आर-पार
अपने को खड़ा एक मैदान के छोर पर पहली बार
देखते एक पवनचक्की को
पवनचक्की को मुझे देखते,
समतल विस्तार की
छुप जाती नगण्यता मेरी
-मोहन राणा
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