Wednesday, February 6, 2019

उपलब्धि

मैं क्या जिया ? 

मुझको जीवन ने जिया - 
बूँद-बूँद कर पिया, मुझको 
पीकर पथ पर ख़ाली प्याले-सा छोड़ दिया 

मैं क्या जला? 
मुझको अग्नि ने छला -
मैं कब पूरा गला, मुझको 
थोड़ी-सी आँच दिखा दुर्बल मोमबत्ती-सा मोड़ दिया 

देखो मुझे 
हाय मैं हूँ वह सूर्य 
जिसे भरी दोपहर में 
अँधियारे ने तोड़ दिया !
                        -धर्मवीर भारती

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