Tuesday, February 5, 2019

यही हालात इब्तदा से रहे

यही हालात इब्तदा[1] से रहे 
लोग हमसे ख़फ़ा-ख़फ़ा-से रहे 

बेवफ़ा तुम कभी न थे लेकिन 
ये भी सच है कि बेवफ़ा-से रहे 

इन चिराग़ों में तेल ही कम था 
क्यों गिला फिर हमें हवा से रहे 

बहस, शतरंज, शेर, मौसीक़ी[2] 
तुम नहीं रहे तो ये दिलासे रहे 

उसके बंदों को देखकर कहिये 
हमको उम्मीद क्या ख़ुदा से रहे 

ज़िन्दगी की शराब माँगते हो 
हमको देखो कि पी के प्यासे रहे
                                -जावेद अख़्तर

No comments:

Post a Comment