Tuesday, February 5, 2019

जब वसन्त आया

वसन्त आया
बहार लाया
हवा कुछ ग़रम
ठण्ड नरम
वसन्त आया
हँसता हुआ
रंग लाया फूलों
पत्तों में
ग्रीष्म से पहले नीला आकाश
हल्के कपासी बादल
लाया वसन्त अपने साथ
आया नहा-धो लम्बी नींद से
सुबह जल्दी उठ गया,
कब मुझे पता भी न चला अपने में डूबे
साथ हो लिया अचानक ही देखा
अरे वसन्त!
            -मोहन राणा   

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